देहरादून। पंचम अपर सिविल जज (सी.डी.)/ए.सी.जे.एम., देहरादून की अदालत ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश की मांग को लेकर दाखिल सरोज बाला रावत की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने पत्रावली में उपलब्ध दस्तावेजों, पुलिस की ओर से प्रस्तुत आख्या और संबंधित पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद माना कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई संज्ञेय अपराध सामने नहीं आता, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जा सके।
याचिका में सरोज बाला रावत ने आरोप लगाया था कि चार मई 2025 की रात पुलिस अधिकारियों ने उनके और उनके नाबालिग बेटे के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने पुलिस पर बिना वारंट हिरासत में लेने तथा मोबाइल फोन और निजी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने का भी आरोप लगाया था। आवेदिका ने पुलिसकर्मियों पर पद के दुरुपयोग और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 175(3) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का न्यायालय से आग्रह किया था।
मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून की ओर से अदालत में विस्तृत आख्या प्रस्तुत की गई। पुलिस की ओर से आरोपों को निराधार और द्वेषपूर्ण बताया गया। आख्या में यह भी बताया गया कि आवेदिका के खिलाफ थाना कैंट में पहले से ही गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। पुलिस का पक्ष था कि उसके खिलाफ चल रही वैधानिक कार्रवाई से बचने और पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से आरोप लगाए गए हैं।
अदालत ने पत्रावली के अवलोकन के बाद कहा कि आवेदिका की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। न्यायालय ने लोक सेवकों के विरुद्ध उनके कर्तव्यों के निर्वहन से संबंधित मामलों में विधि द्वारा उपलब्ध सुरक्षा और सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति से जुड़े उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का भी उल्लेख किया।
न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों और कानूनी परिस्थितियों के आधार पर सरोज बाला रावत की याचिका खारिज कर दी। साथ ही पत्रावली को नियमानुसार अभिलेखागार में दाखिल करने का आदेश दिया।
