देहरादून सहसपुर ब्लॉक के अंदर आने वाली ग्राम पंचायत हरियावाला कला (शिवपुरी) में इन दिनों महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की एक प्रेरक कहानी सामने आई है

देहरादून सहसपुर। ग्राम प्रधान का सहयोग और हंसी देवी की हिम्मत: महिलाओं के सशक्तिकरण की नई मिसाल
देहरादून सहसपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत हरियावाला कला (शिवपुरी) में इन दिनों महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की एक प्रेरक कहानी सामने आई है। ग्राम प्रधान रजनी नेगी के सहयोग और मार्गदर्शन से गाँव की महिलाएँ नए-नए कार्यों को सीखकर अपने जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
इसी क्रम में गाँव की निवासी हंसी देवी ने अपने साहस और मेहनत से एक नई शुरुआत की है। डेयरी कार्य से जुड़े होने के कारण उनके पास गोबर की पर्याप्त उपलब्धता थी। इस संसाधन को उपयोग में लाते हुए उन्होंने लगभग सत्तर हजार रुपये की लागत से गोबर से लकड़ी बनाने वाली मशीन लगाई। अब उसी गोबर से तैयार की गई लकड़ियाँ हवन सामग्री, मुक्तिधाम और होटलों में उपयोग के लिए तैयार की जा रही हैं, जिससे पर्यावरण के अनुकूल विकल्प भी सामने आ रहा है।
इतना ही नहीं, हंसी देवी केचुएँ की खाद (वर्मी कम्पोस्ट) भी तैयार कर रही हैं, जिससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का एक नया रास्ता खुलेगा। यह पहल न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि गाँव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
ग्राम प्रधान रजनी नेगी का कहना है कि उनका प्रयास है कि गाँव की महिलाएँ अपने भीतर छिपी क्षमता को पहचानें और आत्मनिर्भर बनें। वे लगातार महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं कि वे अपने कौशल के आधार पर छोटे-छोटे रोजगार शुरू करें और अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ें।
हंसी देवी का मानना है कि यदि महिलाएँ एक-दूसरे का साथ दें तो वे अपने परिवार और समाज की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकती हैं। वे विशेष रूप से उन महिलाओं को अपने साथ जोड़ना चाहती हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या अपने घर से बाहर जाकर काम नहीं कर पातीं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से वे इस पहल को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं।
इस कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि हंसी देवी स्वयं इन दिनों स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। ग्राम प्रधान रजनी नेगी के सहयोग और अपने मजबूत संकल्प के बल पर उन्होंने न केवल अपने लिए रोजगार का रास्ता बनाया, बल्कि अब अन्य महिलाओं को भी काम देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
आज हंसी देवी की यह पहल गाँव की कई महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। यह कहानी बताती है कि जब महिलाओं को सही मार्गदर्शन और सहयोग मिलता है, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बनती हैं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत आधारशिला भी रखती हैं।

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