214वें स्थापना दिवस पर गूंजा कुमाऊं रेजिमेंट की वीरता और बलिदान का गौरवगान, देहरादून में जुटे 200 गौरव सेनानी, वीर नारियों और वरिष्ठ सेनानियों का हुआ सम्मान

214वें स्थापना दिवस पर गूंजा कुमाऊं रेजिमेंट की वीरता और बलिदान का गौरवगान, देहरादून में जुटे 200 गौरव सेनानी, वीर नारियों और वरिष्ठ सेनानियों का हुआ सम्मान

देहरादून। देश की रक्षा, वीरता, अनुशासन और बलिदान की गौरवशाली परंपरा को समर्पित कुमाऊं रेजिमेंट का 214वां स्थापना दिवस देहरादून में हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। गौरव सेनानी संगठन कुमाऊं रेजिमेंट, नागा रेजिमेंट एवं कुमाऊं स्काउट्स देहरादून संभाग की ओर से आयोजित इस समारोह में लगभग 200 गौरव सेनानियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों ने प्रतिभाग किया। पर्वतीय कल्याण समिति, स्मितनगर के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभक्ति, सैनिक परंपरा, आपसी भाईचारे और कुमाऊंनी संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।
स्थापना दिवस समारोह के दौरान जहां एक ओर देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई, वहीं दूसरी ओर रेजिमेंट के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए पूर्व सैनिकों के योगदान और उनके अनुभवों को सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में मौजूद गौरव सेनानियों के उत्साह ने यह संदेश दिया कि सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनके भीतर देशभक्ति, अनुशासन और रेजिमेंट के प्रति समर्पण की भावना आज भी उतनी ही मजबूत है।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ गौरव सेनानी संगठन के संरक्षक एवं वरिष्ठ सेनानी कप्तान मथुरा दत्त चौबे ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही समारोह का विधिवत आगाज हुआ। इसके पश्चात उपस्थित गौरव सेनानियों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें नमन किया।
इस अवसर पर सैनिकों के त्याग, समर्पण और अदम्य साहस को याद किया गया। समारोह में उपस्थित पूर्व सैनिकों ने रेजिमेंट की उन गौरवशाली परंपराओं को स्मरण किया, जिनके आधार पर भारतीय सेना में कुमाऊं रेजिमेंट ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल स्थापना दिवस मनाना ही नहीं, बल्कि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को एक मंच पर एकत्रित करना, आपसी संबंधों को मजबूत बनाना तथा नई पीढ़ी को सैनिक जीवन के अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा की भावना से परिचित कराना भी रहा।
कप्तान गोविंद सिंह रावल ने रेजिमेंट के गौरवशाली इतिहास पर डाला प्रकाश
संगठन के सचिव कप्तान गोविंद सिंह रावल ने समारोह में उपस्थित सभी गौरव सेनानियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को कुमाऊं रेजिमेंट के स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने रेजिमेंट के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए इसकी वीरता, शौर्य और देश के प्रति समर्पण की परंपरा को याद किया।

उन्होंने कहा कि कुमाऊं रेजिमेंट का इतिहास गौरवशाली रहा है और इस रेजिमेंट के वीर सैनिकों ने विभिन्न परिस्थितियों में अपने अदम्य साहस का परिचय दिया है। रेजिमेंट की पहचान उसके अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, बहादुरी और मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने के संकल्प से जुड़ी है।
कप्तान गोविंद सिंह रावल ने परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर सोमनाथ शर्मा और मेजर शैतान सिंह के शौर्य एवं बलिदान को भी याद किया। मेजर सोमनाथ शर्मा को स्वतंत्र भारत का पहला परमवीर चक्र मरणोपरांत प्रदान किया गया था। वहीं, मेजर शैतान सिंह ने 1962 के भारत-चीन युद्ध में रेजांग ला के मोर्चे पर अद्वितीय वीरता का परिचय दिया था। दोनों वीरों का जीवन और उनका बलिदान देश के सैनिक इतिहास में विशेष स्थान रखता है।

उन्होंने रेजिमेंट की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों तक देशभक्ति का संदेश पहुंचाने के महत्व पर भी जोर दिया।
वरिष्ठ सेनानियों ने दीं स्थापना दिवस की शुभकामनाएं
समारोह में संगठन के संरक्षक एवं वरिष्ठ सेनानी कप्तान मथुरा दत्त चौबे और कप्तान दीवान सिंह बोहरा ने उपस्थित सभी गौरव सेनानियों तथा उनके परिवारों को स्थापना दिवस की बधाई दी।

दोनों वरिष्ठ सेनानियों ने इस अवसर पर आपसी एकता, भाईचारे और संगठन की मजबूती के महत्व को रेखांकित किया। पूर्व सैनिकों का एक मंच पर एकत्रित होना उनकी साझा सैन्य विरासत और रेजिमेंट के प्रति अटूट लगाव को दर्शाता है।
वहीं, संगठन के अध्यक्ष सूबेदार मेजर विक्रम सिंह भंडारी ने भी सभी गौरव सेनानियों और उनके परिजनों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने समारोह में शामिल सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को स्थापना दिवस की बधाई देते हुए रेजिमेंट की गौरवशाली परंपराओं को याद किया। पूरे आयोजन में उत्साह, आत्मीयता और सैनिक भाईचारे का माहौल बना रहा।

वरिष्ठ सेनानियों और वीर नारियों को किया गया सम्मानित
स्थापना दिवस समारोह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वरिष्ठ सेनानियों और वीर नारियों का सम्मान रहा। कार्यक्रम के दौरान उन लोगों को सम्मानित किया गया, जिनका जीवन सैनिक सेवा, त्याग और समर्पण की भावना से जुड़ा रहा है।
वीर नारियां उन परिवारों की प्रेरणादायक प्रतिनिधि हैं, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्रियजनों के योगदान और बलिदान को अपने जीवन का हिस्सा बनाया है। उनका सम्मान करना सैनिक परिवारों के प्रति समाज की कृतज्ञता व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

समारोह में वरिष्ठ सेनानियों के अनुभवों और योगदान को सम्मान देते हुए संगठन की एकजुटता को मजबूत करने का संदेश दिया गया। इस तरह के आयोजन पूर्व सैनिकों को आपस में जुड़ने, अपने पुराने साथियों से मिलने और अपनी साझा यादों को ताजा करने का अवसर प्रदान करते हैं।
तंबोला, सामूहिक भोज और म्यूजिकल चेयर रेस ने बढ़ाई रौनक
स्थापना दिवस समारोह को यादगार बनाने के लिए मनोरंजन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान तंबोला खेला गया, जिसमें उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इसके बाद सामूहिक भोज की व्यवस्था की गई। इस दौरान गौरव सेनानियों और उनके परिवारों ने एक साथ समय बिताया तथा आपसी मेल-मिलाप को मजबूत किया।
महिलाओं के लिए म्यूजिकल चेयर रेस का आयोजन भी किया गया। इस गतिविधि में महिलाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। खेलकूद और मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रमों ने समारोह में नई ऊर्जा भर दी।

कार्यक्रम का वातावरण केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें परिवारों की भागीदारी ने आयोजन को आत्मीय और यादगार बना दिया। हंसी-खुशी, आपसी बातचीत और पुराने साथियों से मुलाकात के बीच सभी ने स्थापना दिवस का भरपूर आनंद लिया।
झोड़ा-चांचरी पर जमकर झूमे गौरव सेनानी और उनके परिवार
समारोह का विशेष आकर्षण उत्तराखंड की पारंपरिक कुमाऊंनी लोकसंस्कृति रही। कार्यक्रम के अंतिम चरण में झोड़ा-चांचरी का आयोजन किया गया, जिसमें गौरव सेनानियों और उनके परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कुमाऊं की लोकसंस्कृति से जुड़े पारंपरिक गीतों और नृत्य ने पूरे सभागार में उत्सव का माहौल बना दिया। लोकगीतों की धुन पर उपस्थित लोग झूमते नजर आए। इस दौरान पहाड़ की संस्कृति, परंपराओं और अपनी जन्मभूमि के प्रति लगाव की झलक देखने को मिली।

सैनिक जीवन में अनुशासन और कर्तव्य सर्वोपरि होते हैं, लेकिन अपनी मिट्टी, अपनी संस्कृति और अपने लोगों से जुड़ाव भी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। झोड़ा-चांचरी के आयोजन ने इसी भावना को खूबसूरती से प्रस्तुत किया।
कुमाऊंनी संस्कृति की मिठास और गौरव सेनानियों के उत्साह ने स्थापना दिवस समारोह को विशेष बना दिया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं और रेजिमेंट के स्थापना दिवस को यादगार बनाया।
लगभग 200 लोगों की मौजूदगी ने दिखाई संगठन की एकजुटता

गौरव सेनानी संगठन कुमाऊं रेजिमेंट, नागा रेजिमेंट एवं कुमाऊं स्काउट्स देहरादून संभाग के इस आयोजन में लगभग 200 लोगों ने हिस्सा लिया। इतनी बड़ी संख्या में गौरव सेनानियों और उनके परिवारों का एकत्रित होना संगठन के प्रति उनके लगाव और आपसी संबंधों को दर्शाता है।
समारोह में पूर्व सैनिकों के बीच पुरानी यादें साझा करने, अपने साथियों से मिलने और संगठन के साथ जुड़ाव को मजबूत करने का अवसर मिला। कार्यक्रम ने यह भी संदेश दिया कि सैनिक जीवन की सबसे बड़ी ताकत अनुशासन, एकता, समर्पण और अपने साथियों के प्रति विश्वास है।
रेजिमेंट की गौरवशाली विरासत केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सैनिकों के जीवन में आज भी जीवंत है, जिन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा देश की सेवा में समर्पित किया।
स्थापना दिवस समारोह में ये पदाधिकारी और गौरव सेनानी रहे मौजूद
समारोह में संगठन के संरक्षक एवं वरिष्ठ सेनानी कप्तान मथुरा दत्त चौबे, वरिष्ठ सेनानी कप्तान दीवान सिंह बोहरा, अध्यक्ष सूबेदार मेजर विक्रम सिंह भंडारी, सचिव कप्तान गोविंद सिंह रावल, उपाध्यक्ष सूबेदार मेजर बहादुर सिंह नागरकोटी, कोषाध्यक्ष कप्तान डिगर सिंह और उपकोषाध्यक्ष कप्तान हरीश कुंवर उपस्थित रहे।

इनके अतिरिक्त समारोह में कप्तान खरक सिंह सोन, कप्तान नरेंद्र धामी, कप्तान गंगा दत्त, कप्तान गोपाल सिंह, कप्तान दीवान सिंह, सूबेदार टिकेंद्र सिंह, कप्तान चतर सिंह, सूबेदार हरीश बिष्ट, कप्तान राजेंद्र, कप्तान दुर्गा सिंह, कन्याल सिंह, कप्तान विक्रम शाह, सूबेदार मेजर उमेद गिरी, सूबेदार जगत सिंह धपोला, सूबेदार तेज बहादुर थापा, सूबेदार जगत राम, कप्तान उमेद सिंह बिष्ट, कप्तान किशन सिंह और कप्तान भरत सहित अन्य गौरव सेनानी मौजूद रहे।
समारोह में शामिल सभी लोगों ने स्थापना दिवस की शुभकामनाएं साझा कीं और रेजिमेंट की गौरवशाली परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
पहाड़, जन्मभूमि और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश
समारोह के दौरान कुमाऊं की जन्मभूमि, पहाड़ और अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम की भावना भी देखने को मिली। कुमाऊं की मिट्टी ने देश को अनेक वीर सैनिक दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
इसी भावना को व्यक्त करती कुमाऊंनी पंक्तियों ने समारोह को और भावपूर्ण बना दिया

हम छूं कुम्मयां, हमरो कुमाऊं यो छ हमारो पहाड़,
यो छ हमारी जन्मभूमि, यो छ हमारो घरबार।
ताजी हवा छ, ठंडो छ पानी,
यो भूमि माजा शिवाजी रूनी,
शिवाजी शिवा संसार कुनी,
यो छ कैलाश दरबार।

इन पंक्तियों के माध्यम से अपनी जन्मभूमि, पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और मातृभूमि के प्रति प्रेम की भावना व्यक्त की गई।
गौरव, सम्मान और सैनिक भाईचारे के नाम रहा 214वां स्थापना दिवस
कुमाऊं रेजिमेंट का 214वां स्थापना दिवस समारोह देशभक्ति, वीरता, सम्मान और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। दीप प्रज्ज्वलन से शुरू हुआ यह आयोजन शहीदों को श्रद्धांजलि, वरिष्ठ सेनानियों और वीर नारियों के सम्मान, खेलकूद तथा पारंपरिक झोड़ा-चांचरी के साथ यादगार बन गया।
लगभग 200 लोगों की भागीदारी ने संगठन की मजबूती और रेजिमेंट के प्रति गौरव सेनानियों के अटूट लगाव को प्रदर्शित किया। समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि वर्दी भले ही उतर जाए, लेकिन देशसेवा का जज्बा, सैनिक अनुशासन और मातृभूमि के प्रति समर्पण कभी समाप्त नहीं होता।
कुमाऊं रेजिमेंट का गौरवशाली इतिहास, वीर सैनिकों का बलिदान और पूर्व सैनिकों की एकजुटता आने वाली पीढ़ियों को हमेशा देशप्रेम, कर्तव्य और समर्पण की प्रेरणा देती रहेगी।
प्रकाशित करने से पहले एक जरूरी बात: मूल जानकारी में कुछ नामों की वर्तनी और नामों के बीच का अंतर स्पष्ट नहीं है। इसलिए कप्तान राजेंद्र, कप्तान दुर्गा सिंह और कन्याल सिंह सहित सभी नामों की सूची संगठन से एक बार सत्यापित कर लें। साथ ही, स्थापना दिवस के 214वें वर्ष से संबंधित ऐतिहासिक विवरण की भी पुष्टि कर लें।

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